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(1) कर्मचारी राज्य बीमा निगम, क्षेत्रीय कार्यालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित शाखा कार्यालयों (सिंक्किम को छोड़कर)  में वर्ष 2018-2019 में हाउस कीपींग कार्य के लिए जन शक्ति की आपूर्ति (2) “महत्वपुर्ण सूचना” : 30 (तीस) दिनों के अंदर, अस्थाई पहचान पत्र की समाप्ति” : अधिक जानकारी के लिए, “नवीनतम सूचना” देखें। (3) आफलाइन चालानों की स्वीकृति एस.बी.आई. शाखाओं द्वारा – के संबंध में : अधिक जानकारी के लिए, “समाचार एवं घटनाक्रम” देखें।

प्रतिपूर्ति

विनियम 69 के अंतर्गत प्रत्येक नियोक्ता को दुर्घटना मामलों में दुर्घटनाग्रस्त बीमाककृत व्यक्ति को बी.चि.अ./बी.चि.व्य. द्वारा देखे जाने तक प्राथमिक उपचार चिकित्सा देखभाल की व्यवस्था करनी है और ऐसे नियोक्ता समय-समय पर निर्धारित स्तर के अधिकतम तक इस पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए हकदार हैं | तथापि प्रतिपूर्ति की अनुमति नहीं होगी यदि किसी अन्य अधिनियम के अंतर्गत नियोक्ता को ऐसी चिकित्सा सहायता नि:शुल्क उपलब्ध कराना अपेक्षित हो |

नियोक्ता को ऐसे आकस्मिक उपचार की व्यवस्था के परिव्यय की प्रतिपूर्ति संबंधित राज्य के निदेशक/प्रा.चि.अ. (क.रा.बी. योजना) द्वारा की जाएगी और इसलिए ऐसी उपयुक्त रसीद एवं वाउचर सहित सभी दावे जांच एवं भुगतान के लिए उन्हें भेजे जाने चाहिए |

विनियम-96क के अंतर्गत चिकित्सा उपचार पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति 

विनियम-96क बताता है :- बीमाकृत व्यक्ति एवं उसके परिवार के चिकित्सा उपचार पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति के दावे की स्वीकृति ऐसी परिस्थितियों में या निगम के सामान्य या विशेष आदेश में उल्लेख के शर्ताधीन हो |

इस विनियमन के अंतर्गत निम्नलिखित शर्तें दी गई हैं :-

  • बीमाकृत व्यक्ति एवं उसके परिवार के चिकित्सा उपचार पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति का पूरा प्राधिकार संबंधित राज्य सरकार को है |
  • यह राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ दिया जाए कि अपनी व्यवस्था के अंतर्गत व्यय की स्वीकृति के लिए प्राधिकार का निर्णय वे स्वयं करें |
  • प्रतिपूर्ति के दावे को प्रस्तुत करने की समय-सीमा एक वर्ष है |

राज्य सरकार को चिकित्सा देखभाल पर व्यय की प्रतिपूर्ति से संबंधित मामलों पर विचार करते समय निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना है :-

  • क्या प्रतिपूर्ति की सिफारिश की गई सुविधाएं राज्य में उपलब्ध नहीं हैं
  • क्या जिस अस्पताल में बीमाकृत व्यक्ति को भेजा गया है या भेजा जाना प्रस्तावित है अपेक्षित सुविधाओं/सेवाओं वाला निकटतम अस्पताल है

उन मामलों के प्रकार की सूची जिनके लिए प्रतिपूर्ति की अनुमति है, नीचे दी गई है :-

  1. तकनीकी खराबी के कारण चल औषधालय वैन की खराबी के मामले में/या इसके निर्धारित समय का पालन करने या ऐसे औषधालय से जुड़े बीमाकृत व्यक्ति को गंभीर चोट लगने या औषधालय के बन्द रहने के दौरान गंभीर रूप से बीमार हो जाने के मामले में प्रतिपूर्ति की अनुमति है
  2. अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण क.रा.बी. औषधालय/आपात केन्द्र के बंद रहने के दौरान बीमाकृत व्यक्तियों एवं उनके परिवार के सदस्यों के निजी उपचार का सहारा लेना पड़े |
  3. बीमा चिकित्सा अधिकारी/विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित दवाइयां क.रा.बी. औषधालय/अनुमोदित दवाई विक्रेता के पास खत्म हो गई हों जिसके कारण बीमाकृत व्यक्ति को दवाइयां बाज़ार से खरीदने हेतु विवश होना पड़ रहा हो |
  4. दवाइयां जो विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित की गई हों और बी.चि.अ./बीमा चिकित्सा व्यवसायी द्वारा प्रदान नहीं की गई हों एवं जहाँ विशेषज्ञ ऐसी विशेष दवाइयों को बाह्य या अंत: रोगी हितभागी के उपचार के लिए बिल्कुल आवश्यक मान रहे हों और जहां कोई दवाई उसके समान प्रभावी नहीं मानी गई हो |
  5. विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित विशेष उपकरणों जैसे मेरुदंड आलंब, सर्विकल कॉलर्स, वॉकिंग कैलिपर्स एवं बैसाखियाँ आदि को यदि उपचार के अंग के रूप में आवश्यक समझा गया हो|
  6. जहां कोई बी.चि.अ./बी.चि.व्य. बीमाकृत व्यक्ति द्वारा अनुरोध करने के बावजूद उसके घर नहीं गया हो जिससे बीमाकृत व्यक्ति को उपचार के लिए निजी व्यवस्था करनी पड़ी हो | पैनल व्यवस्था के अंतर्गत ऐसे खर्चों की वसूली चिकित्सा सेवा समिति द्वारा जांच उपरांत की गई सिफारिश पर बी.चि.व्य. से की जाए |
  7. दुर्घटना या बीमारी के गंभीर मामलों में जहां रोगी के रोग-विषयक हालत, बेहोश आदि होने के कारण सीधे मान्यताप्राप्त अस्पतालों में दाखिल होने पर रोगी के क.रा.बी. का मरीज होने की पहचान करना संभव नहीं हुआ हो और अस्पताल प्राधिकारियों ने अस्पताल का खर्च सीधे रोगी या नियोक्ता से वसूला हो
  8. दुर्घटना/बीमारी के गंभीर मामले जहां हितभागी सीधे निजी अस्पताल या गैर मान्यताप्राप्त अस्पताल में भर्ती हुआ हो जहां योजना के अंतर्गत मान्यताप्राप्त अस्पताल में दाखिल होने से उसका स्वास्थ्य जोखिम में हो जैसे अकस्मात हृदयघात, रीढ़ की हड्रडी का टूटना, मस्तिष्क रक्तस्राव आदि
  9. खून चढ़ाने के लिए जांच पर हुए खर्च
  10. मानसिक मामलों जिसमें विशेषीकृत उपचार जैसे ई.सी.टी. आदि पर बाह्य रोगी के रूप में खर्च हुआ हो |
  11. मान्यताप्राप्त अस्पतालों में दाखिल दुर्घटना एवं बीमारियों के गंभीर मामले जहां क.रा.बी. के लिए आरक्षित सभी बिस्तरें भर चुके हो |
  • बीमाकृत व्यक्ति द्वारा किए गए सवारी प्रभार की प्रतिपूर्ति जहां योजना के अंतर्गत रोगी वाहन या कोई अन्य यातायात-साधन किसी कारण से उपलब्ध नहीं हो और जहां बी.चि.अ./बी.चि.व्य. की राय में रोगी चलने योग्य नहीं हो |
  • विशेषज्ञ द्वारा संस्तुत जांच प्रयोगशाला परीक्षण, एक्स-रे, अन्य इमेजिंग सेवाएं इत्यादि के मामले में परंतु जहां बीमाकृत व्यक्ति मशीन के खराब होने के कारण या प्रयोगशाला जांच की प्रकृति ऐसी हो कि यह मान्यताप्राप्त प्रयोगशाला/अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की सीमा से बाहर रहा हो |
  • उपर्युक्त मामलों के प्रकारों के अलावा अन्य मामलों में भी प्रतिपूर्ति स्वीकृत की जाए जो प्रत्येक मामले के गुणों एवं उन परिस्थितियों, जिनके अंतर्गत खर्च किया गया, पर आधारित है |

सवारी प्रभार की प्रतिपूर्ति 

रोगी वाहन की उपलब्धता के अभाव में एवं जहां आपात्र में जरूरत पड़ी हो, शीघ्र यातायात का कोई भी प्रकार प्रयोग किया जा सकता है और इस पर खर्च की राशि की बीमाकृत व्यक्ति को प्रतिपूर्ति (दोनों तरफ) सरकार/परिवहन प्राधिकरण द्वारा निर्धारित अधिकतम दर के अधीन हो|

बीमाकृत व्यक्ति एवं उसके परिवार को कठिनाई से बचाने के लिए जिन्हें भर्ती होने के लिए किसी अस्पताल या चिकित्सा संस्थान, विशेषज्ञ से परामर्श या जांच के लिए जाना पड़ता है परंतु जिनकी स्थिति ऐसी नहीं है कि उन्हें रोगी वाहन की जरूरत हो, सवारी प्रभार के भुगतान का प्रावधान किया गया है बशर्ते कि जहाँ मामले को भेजा गया है वह अस्पताल/चिकित्सा संस्थान स्टेशन से बाहर या क.रा.बी. औषधालय या पैनल चिकित्सक के चिकित्सालय से 8 कि.मी. से अधिक दूर हो | यह प्रभार ऐसी श्रेणी, रेल भाड़े या सार्वजनिक सवारी की एक सीट के आने-जाने के खर्च तक सीमित है |

यदि हितभोगी इस स्थिति में हो कि बिना अनुरक्षक के यात्र नहीं कर सके, जिसका दर्ज किए जाने योग्य कारण हो और बी.चि.अ./बी.चि.व्य. द्वारा ऐसा सत्यापित किया गया हो, सहायक के लिए सवारी भत्ता स्वीकृत है |

बी.चि.अ./बी.चि.व्य. को ऐसे भुगतान का अलग खाता निर्धारित रजिस्टर में रखना चाहिए एवं इस व्यय का त्र्ैमासिक विवरण मार्च, जून, सितम्बर एवं दिसम्बर तिमाही के अंत से 15 तारीख तक निदेशक/प्रा.चि.अ. को भेजा जाना चाहिए | राज्य कि विभिन्न क्षेत्रें से प्राप्त विवरणों को निदेशक/प्र.चि.अ. द्वारा समेकित किया जाए और त्र्ैमासिक विवरण निगम को भेजा जाए |

क.रा.बी. योजना के अंतर्गत सवारी प्रभार पर व्यय चिकित्सा देख-भाल का भाग है और इसलिए निर्धारित अधिकतम सीमा के अंतर्गत सामान्य अनुपात में निगम एवं राज्य सरकार के बीच बांटे जाने योग्य है |